तुझे पाना मेरी काबिलियत नही,
तुझे खरीदना मेरी हेसियत नही।
जो हुं तेरे सामने हुं,कर भरोसा,
तुझे धोखा देना मेरी शख्सियत नही।
जो भी कहेता हु इतमीनान से कहेता हु,
तुझे सुना रहा हु,वो मेरी रवायत नही।
मे तुझे पुरी शिद्दत से चाहता हु,
तुझे खो देना मेरी इनायत नही।
"आभास "का अभी मुझे वाक्फियत नही,
तुझे उसके बारे मे कहना मेरी नसियत नही।
-आभास
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