दिल का शिशा फीसला तो टूट के बीखर गया,
हम बिखरे टूकडो को संभाले हुए हैं...!!!
कभी करेगा वो अपनी महोब्बत का इजहार,
हम दिल ही दिल मे आस लगाए हुए हैं...!!!
चारागर चाहे की बीमार का हाल अच्छा हो,
हम ही ज़ख्मों पे नमक लगाए हुए हैं...!!!
जलाना और बुजाना पुरानी आदत हैं उसकी,
हम चराग-ए-इश्क दिल मे जलाए हुए हैं...!!!
दिल की लगी हैं या हैं दिल्लगी ये वोही जाने,
हम उनके अल्फाजो पे एतबार संभाले हुए हैं...!!!
-Karim Movar
No comments:
Post a Comment