पूरा दुख और आधा चाँद
हिज्र की शब और ऐसा चाँद
यादों की आबाद गली में
घूम रहा है तन्हा चाँद
मेरे मुँह को किस हैरत से
देख रहा है भोला चाँद
जब पानी में चहेरा देखा
तूने किसको सोचा चाँद
हाथ हिलाकर रूखसत होगा
उसकी सूरत हिज का चाँद
सेह्रा सेह्रा भटक रहा है
अप्ने इश्क़ में सच्चा चाँद
रात के शायद एक बजे हैं
सोता होगा मेरा चाँद
~परवीन शाकिर
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